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सोमवार, 30 जुलाई 2007

दूसरे सबसे अमीर भारतीय बने अनिल

एजेंसी नई दिल्ली, 8 जुलाई। बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह का मुहावरा एडीएजी के मालिक अनिल अंबानी पर लागू होता दिखता है, जहां वह अपने भाई मुकेश अंबानी के बाद एक लाख करोड़ रुपए की संपत्ति वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। एडीएजी का प्रमुख कंपनी रिलायंस कम्यूनिकेशन काबाजार पूंजीकरण 12657 करोड़ रुपए हैं, जिसमें से प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 67 फीसदी है। इसके कारण अनिल अंबानी की संपत्ति 74354 करोड़ रुपए हो जाती है। इसी प्रकार रिलायंस कैपिटल का बाजार पूंजीकरण 28219 करोड़ रुपए हो गया, जिसमें से अनिल अंबानी की हिस्सेदारी 53 फीसदी है और जिसका मूल्य लगभग 15000 करोड़ रुपए है। इन सबके साथ रिलायंस इनर्जी, रिलायंस नैचरल रिसॉर्सेज लिमिटेड के अलावा बड़े भाई के रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में 2856 करोड़ रुपए के शेयरों को मिलाकर अनिल अंबानी की कुल संपत्ति करोड़ रुपए से अधिक हो रही है।
हाल ही में शेयर बाजार में लिस्टेड हुए रीअल एस्टेट कंपनी डीएलएफ में अध्यक्ष के.पी. सिंह अनिल अंबानी से थोड़े ही पीछे हैं। बीसएसई में शुक्रवार के बंद स्तर के हिसाब से समूह कंपनी में सिंह की हिस्सेदारी के अनुरूप बाजार पूंजीकरण हिसाब से उनकी संपत्ति लगभग करोड़ रुपए है।

बेशुमार दौलत कमाने वाला रिलायंस इंडिया लिमिटेड टैक्स देने से बचना चाहता है!

मैं यह पढ़कर हैरान हो गई कि रिलायंस इंडिया लिमिटेड, जो कि सबसे अमीर और बड़ी हिन्दोस्तनी कंपनियों में से एक है, केन्द्रीय सरकार को 770 करोड़ रूपये का बिक्री कर नहीं दे रहा है।
रिलायंस उन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को तेल बेचता है, जिन्होंने रिलायंस के जामनगर स्थित तेल शोधक कारखाने से प्राप्त उत्पादों पर केंद्रीय बिक्री कर देना रोक दिया है। चूंकि रिलायंस उनसे टैक्स की अदायगी नहीं कर पा रहा है, इसलिये वह मांग कर रहा है कि ये टैक्स माफ़ कर दिये जायें और उम्मीद कर रहा है कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स को माफ करने की उसकी याचिका को मंजूर कर लेगी।
यह टैक्स पहले भूतपूर्व तेल कोष से भरा जा रहा था परन्तु जब यह कोष समाप्त कर दिया गया था, तो गुजरात सरकार ने 2002 -03 के लिये, रिलायंस कंपनी के टैक्स माफ़ कर दिये थे। परन्तु इस साल, भूतपूर्व वित्त मंत्री जसवंत सिंह के अंतरिम बजट के फैसले के अनुसार, 2003 -04 से रिलायंस कंपनी को यह टैक्स भरना था। जाना जाता है कि रिलायंस कंपनी ने संप्रग सरकार से फिर अपील की है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर बकाया टैक्स का भुगतान कौन करेगा, यह मुद्दा फिर से उठाया जाए, क्योंकि रिलायंस ने 2003 -04 के अपने खातों से इसका कोई इंतज़ाम नहीं किया है।
मैं एक निजी कंपनी में एकाउंटेंट का काम करती हू। यह कंपनी सरकार और विभिन्न सरकारी मंत्रालयों व उद्यमों को सामग्रियां व सेवायें दिलाती है। कंपनी को अपने ग्राहकों से सेवा कर अदा करना पड़ता है और फिर उसे सरकार को देना पड़ता है। परन्तु कई बार, कुछ ग्राहक, खास तौर पर सरकारी विभागों के ग्राहक, सेवा कर नहीं देते हैं। इसके बावजूद, कंपनी को यह कर सरकार को देना पड़ता है।
यह साफ जाहिर है कि बड़े और मालदार पूंजीपतियों के साथ अलग ही कानून लागू होते हैं। मालदार पूंजीपति पहले मजदूरों का शोषण करके और फिर अपने टैक्स आदि न देकर, अपने आपको और मालदार बनाते हैं।
आपकी पाठक सुधा, नई दिल्ली

फेरीवालों के माध्यम से घरों तक सब्जी और फल पहुंचाएगा रिलायंस

भोपाल । रिलायंस फ्रेस ने अब खुदरा व्यापार से तौबा करने की ठानी है। रिलायंस अब फेरी लगाने वाले सब्जी विक्रेताओं के माध्यम से सब्जी और फल बेचने की रणनीति तैयार की है। रिलायंस समूह किसी भी कीमत पर खेतिहर कामकाज को रिलायंस के एकाधिकार में लाने एत्रडी चोटी का जोर लगा रहा है। संविदा खेती के नाम पर किसानों की जमीन पर कब्जा करने तथा कृषि उपज पर एकाधिकार कर वह दोनों हाथों से धन बटोरने की महात्वाकांक्षी योजना को रिलायंस हर हालत में पूरा करना चाहता है। रिलायंस फ्रेस ने इसी रणनीति के तहत फेरीवालों सब्जी विक्रेताओं को माध्यम बनाकर रिटेल फ्रेस के काम को आगे बत्रढाने का निर्णय लिया है। रिलायंस ने बत्रडे नगरों की सब्जी मंडियों को भारी भरकम राशि देकर अपने कब्जे में करने का प्रयास करना शुरू कर दिया है। कोलकाता की सब्जी मंडी के बाद रिलायंस अब भोपाल सब्जी मंडी को हथियाने का प्रयास कर रहा है।
नगर निगम को एक मुश्त बत्रडी राशि देकर बाजार को कब्जाने की रणनीति तैयार की है। कुछ दिनों में रिलायंस की फल व सब्जी आपके दरवाजे पर मिलेगी। मोहल्ले में फेरी लगा कर फल-सब्जी बेचने वाले आपके पास आएंगे। कंपनी ने अपने रिटेल स्टोर रिलायंस फ्रेश के द्वारा विक्रय को कुछ दिन के लिए टाल दिया है। इनके स्थान पर रिलायंस थोक विक्रय केन्द्र शुरू कर रहा है। पहले रांची और उसके बाद इंदौर में रिलायंस फ्रेश का विरोध होने के बाद कंपनी ने भोपाल में स्टोर खोलने की योजना को टाल दिया। भोपाल में भी कुछ संगठनों ने इनके खिलाफ प्रदर्शन किया था। कंपनी ने अब अपनी रणनीति भी बदल ली है। रिलायंस फ्रेश के स्थान पर थोक विक्रय केन्द्र शुरू किए जा रहे हैं। कंपनी सूत्रों के अनुसार फेरी लगा कर सब्जी बेचने का कारोबार करने वाले लोग इन थोक विक्रय केन्द्र से सामग्री ले सकेंगे। इसकी सफलता के बाद ही रिलायंस फ्रेश शुरू होंगे।
बहरहाल रिलायंस समूह देश के कृषि व्यापार के सबसे बत्रडा राजस्व देने वाला सब्जी और फल के कारोबार को हाथ में लेने के लिए अरबों रुपया लगाने तैयार बैठा है। रिलायंस की योजना है कि सब्जी उगाने वाले महानगरों के समीप की उपजाऊ जमीन को संविदा के आधार पर किसी भी तरह कब्जाया जाए।

रविवार, 29 जुलाई 2007

हमारा रिलायंसी भविष्य

ये बाज़ार भी बड़ी अजीब चीज़ है, हर जगह हर काम में यह होता है। मानो बाज़ार न हुआ ब्रह्म हो गया – बाज़ारवास्यमिदं सर्वं नेह नानास्ति किंचन् – सब कुछ बाज़ार ही है और बाज़ार के अलावा कुछ नहीं है। हाल में रिलायन्स के खुदरा बाज़ार में क़दम रखने से हड़कम्प मच गया, ठेले वालों ने धरने-प्रदर्शन किए, अख़बार-के-अख़बार पट गए। तब हमें इन अख़बारों से पता चला कि खुदरा बाज़ार हज़ारों करोड़ रुपये का है, इसलिए रिलायंस और वालमार्ट जैसी कम्पनियाँ इसमें कूदना चाहती हैं।
यह सब पढ़कर बड़ी समस्या पैदा हो गई है। हम भविष्यदृष्टा टाइप लोग हैं, सो भविष्य को देख रहे हैं – कल को रिलायंस मोची के काम में भी सेंध लगा सकता है। पता चला कि जूते सीना और पॉलिश करना पचास हज़ार करोड़ रुपये का बाज़ार है। रिलायंस ने जूतों के लिए चमचमाते हुए आउटलेट खोल दिए हैं, जो हर गली के नुक्कड़ पर देखे जा सकते हैं। अब मोची विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन कम्पटीशन भी तगड़ा है। वालमार्ट और टाटा भी इस बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं। सो गली के इस कोने पर वालमार्ट का मोची-आउटलेट है, उस कोने पर रिलायंस का और बीच में टाटा का। जूते पॉलिश कराने के बाद कम्प्यूटराइज़ बिल दिया जाता है, जिसका पेमेंट क्रेडिट कार्ड से भी किया जा सकता है।
कम्पनियों की नज़र ताले-चाबी सही करने के पाँच हज़ार करोड़ के बाज़ार पर है। पहले ताले-चाबी वाले टेर लगाते हुए साइकिल पर गली-गली घूमा करते थे। अब उनकी जगह रिलायंस की एक पॉश वैन घूमती है। चाबी खोने पर लोग “tala” <अपना पता> 666 पर एसएमएस करके इस वैन को तुरंत अपने घर बुला सकते हैं। सही होने पर क्रेडिट कार्ड से पेमेण्ट कर सकते हैं। जो छः महीने में सबसे ज़्यादा ताले सही कराएगा, उसे एक रिलायंस इंडिया मोबाइल मुफ़्त में मिलेगा, वो भी लाइफ़ टाइम वाला। हाँ, एक नई दिक़्क़त ज़रूर खड़ी हो गई है। अब चोरों में भी इन ताला-तोड़ गाड़ियों की बहुत मांग है। सो इस बढ़ती डिमांड के लिए रात में चलने वाली ख़ास ताला-तोड़ वैन का इंतज़ाम किया गया है।सिगरेट-गुटके का बाज़ार “हज़ार करोड़” में नहीं समाता है, यह “लाख करोड़” का है। लोग दिनों-दिन इनका कंसम्पशन बढ़ाते जा रहे हैं। हर चौराहे पर रिलायंस की एटीएम जैसी मशीनें लगी हुई हैं। लोगों के पास कार्ड हैं। कार्ड घुसेड़ा और गुटके-सिगरेट का ब्राण्ड चुना, मशीन से गड़गड़ की आवाज़ के साथ गुटका-सिगरेट बाहर। न... न... यह केवल अभिजात्य पूंजीवादी व्यवस्था नहीं है। ग़रीब और सर्वहारा के लिए भी है। यहाँ से रामआसरे बीड़ी, पान वगैरह भी ले सकता है। जाति-व्यवस्था तोड़ने के लिए ऐसा प्रयोग पहले सिख गुरुओं ने किया था लंगर के रूप में, जहाँ किसी भी जाति का आदमी खाना खा सकता था। और अब ऐसा प्रयोग किया है रिलायंस ने, जहाँ एक ही जगह से हर जाति का आदमी गुटका-सिगरेट पा सकता है।ख़ैर, अब क्या-क्या बताएँ? रिलायंस का नाई, रिलायंस का धोबी, रिलायंस की महरी – ये भविष्य चमचमाता रिलायंसी है। साभार- हिन्दी ब्लॊग् डॊट काम‌